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खाद्य संरक्षण एवं सुरक्षा

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खाद्य संरक्षक

खाद्य संरक्षक

हालांकि भारतीय कृषि-खाद्य क्षेत्र ने आवश्यक खाद्य वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि देखा है। साथ ही इसमें फसल कटाई के बाद नुकसान भी हुए हैं। ये दिन-प्रतिदिन होने वाले नुकसान खाद्य पदार्थों में बढ़ते भौतिक, रासायनिक और सूक्ष्मजैविकीय प्रक्रियाओं के परिणाम हैं।
खाद्य संरक्षक एवं कीट नियंत्रण, भंडारण किए गए अनाज, मसालों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में कीट और संक्रमण नियंत्रण से संबंधित कटाई के बाद के सुरक्षा उपायों के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के कार्य देखता है। खाद्य संरक्षक एवं कीट नियंत्रण की क्षमता धूमन, संग्रहीत उत्पाद कीटविज्ञान, कीटनाशक रसायनविज्ञान, जैव कीटनाशक, सूक्ष्मजीवियों के जैविक उपचार और कीटनाशक विषविज्ञान आदि क्षेत्रों में विशेषज्ञों के बहु-विषयक दृष्टिकोण में निहित है।
भंडारित खाद्य उत्पादों को भंडारण कीटों से बचाना खाद्य सुरक्षा का आधार है। कीट नियंत्रण में पारंपरिक फ्यूमिगेंट्स और कीटनाशक प्रमुख रूप से खतरा बन गए हैं जिसकी वजह से कीटों पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो रहा है । इससे निपटने के लिए अन्‍य विकल्‍प खोजने की आवश्‍यकता है जिससे खाद्य वस्‍तुओं का कीट मुक्‍त भंडारण किया जा सके है।
उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, हम पारंपरिक फ्यूमिगेंट्स के खिलाफ कीट प्रतिरोध के प्रबंधन के लिए वैकल्पिक रणनीति विकसित करने, नए फ्यूमिगेंट्स की प्रभावकारिता की खोज और जांच करने, अनाज के अवशेष मुक्त भंडारण के लिए संशोधित या नियंत्रित वातावरण उपचार के महत्व का अध्ययन करने, फाइटोकेमिकल विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। और आवश्यक तेलों पर आधारित जैव-फ्यूमिगेंट्स संक्रमण नियंत्रण के लिए और कीट का पता लगाने और नियंत्रण उपकरणों को विकसित करने के लिए कीट कीटों की संक्रमण रणनीति को समझना। खाद्य सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण को भारतीय कीटनाशक नियामक प्राधिकरण / केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड द्वारा औद्योगिक सेवाओं और खाद्य पदार्थों में कीट प्रबंधन पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए मान्यता प्राप्त है।


खाद्य सुरक्षा

खाद्य सुरक्षा

खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान मुख्य रूप से आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों, खाद्य रोगजनकों, बायोमार्कर, पौध आधारित विषाक्त पदार्थों, एलर्जेन, मिलावट और पोषण संबंधी लेबलिंग की पहचान के लिए जीनोमिक और पोषक तत्वों पर केंद्रित है। खाद्य अनुप्रयोगों और रोग तंत्र के प्रति प्रोटीन संरचना तथा कार्यात्मक संबंधों को समझने के लिए उन्नत बहुस्तरीय मॉडलिंग उपलब्‍ध हैं। इसके अलावा, अधिकृत पत्र में तेल और वसा, दूध और दूध से तैयार उत्पाद, रासायनिक और औद्योगिक प्रदूषकों की अधिकतम अवशेष सीमा शामिल है, साथ ही कीटनाशकों व एंटीबायोटिक अवशेषों सहित और स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (पीओपी) के अवशेष मुख्य रूप से खाद्य श्रृंखला में उत्‍पन्‍न होने वाली जहरीली धातुओं की सहिष्णुता स्तर जो कि गुणवत्ता आश्वासन और खाद्य मानकों के नए नियमों के कार्यान्वयन में सहायक हैं, के लिए विकासशील और उच्‍चतम स्‍तर की मजबूत वैश्‍लेषिक पद्धतियां (FT-IR, FT-NIR, HPLC, GC-MS, LC-MS/MS, IRMS, ICP आदि) शामिल हैं। इसके अलावा अल्कलॉइड, प्रोटीज इनहिबिटर, टैनिन और फाइटेट जैसे पोषण-विरोधी कारकों पर और प्राकृतिक विषाक्त पदार्थों जैसे कि एगारिक एसिड, हाइड्रोसायनिक एसिड, एफ्लाटॉक्सिन और मायकोटॉक्सिन और जैविक संदूषकों (बैक्टीरिया और कवक प्रजातियों) पर जो बीमारियों का कारण बनते हैं और खाद्य उत्पादों के शेल्फ लाइफ अध्ययन पर शोध किया जाता है। स्ट्रीट फूड वेंडरों द्वारा सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्‍ध कराने के लिए सीएफटीआरआई ने ऊर्जा से भरपूर मोबाइल इंफ्रास्ट्रक्चर स्मार्ट कार्ट विकसित किया है। इसके अलावा तेज़ी से खाद्य का विश्‍लेषण करने हेतु एक रोबस्‍ट टूल किट बनाया गया है जिसका उपयोग करके भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा की देख-रेख की जा सकती है और यह अत्‍यधिक लोकप्रिय हो रहा है।


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